नहर के नाम पर जंगल की खुली लूट!
3 महीने से रेत तस्करी, वन अधिकारी बने मूकदर्शक
सड़क अर्जुनी
तहसील अंतर्गत उमरझरी मुख्य नहर का लगभग 7 किलोमीटर लंबा निर्माण कार्य चिचगांव ग्राम तक पिछले तीन महीनों से जारी है। सिंचाई विभाग द्वारा दिए गए इस कार्य में नहर निर्माण की आड़ में वन क्षेत्र की अवैध रेत का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नहर निर्माण के लिए आवश्यक रेत जामली (डोंडके) वन परिक्षेत्र के कम्पार्टमेंट क्रमांक 527 व 518 के नालों से अवैध रूप से निकाली जा रही है। बीते तीन–चार महीनों में हजारों ब्रास रेत निकालकर नहर से सटे विभिन्न स्थानों पर जमा की गई है। यह सारा उत्खनन एफडीएसएम के माध्यम से और वन प्रकल्प विभाग के कुछ कर्मचारियों की कथित मदद से किया गया।
नहर के किनारे बीते दो महीनों से वन प्रकल्प के जंगलों की कटाई भी लगातार चल रही है। स्थल पर प्रतिदिन दो पोकलैंड और चार जेसीबी मशीनें कार्यरत रहती हैं, फिर भी क्षेत्र सहायक, बीट गार्ड, वनपरिक्षेत्र अधिकारी, उपविभागीय वन अधिकारी तथा उप वनसंरक्षक की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे विभागीय मिलीभगत की आशंका और गहराती जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अवैध रेत तस्करी और जंगल कटाई का यह पूरा खेल नेताओं और बड़े अधिकारियों की सांठगांठ से संचालित हो रहा है। तीन महीने बीत जाने के बावजूद जांच के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
बिना अनुमति किया गया निर्माण कार्य
जानकारी के अनुसार, उमरझरी मुख्य नहर निर्माण का ठेका ठेकेदार नैरकर को दिया गया था। नियमों के अनुसार, वन क्षेत्र से होकर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पहले वन विभाग की स्पष्ट अनुमति आवश्यक होती है, लेकिन ठेकेदार ने ऐसी कोई अनुमति नहीं ली।
इस संबंध में वन विभाग की ओर से भी चौंकाने वाला बयान सामने आया है।
“ठेकेदार नैरकर को वन प्रकल्प के किसी भी जंगल से गुजरने वाली नहर बनाने की अनुमति नहीं दी गई है।”
— एम. एम. नांदेकर, वनपरिक्षेत्र अधिकारी
अब सवाल यह है कि जब अनुमति ही नहीं थी, तो फिर जंगल से होकर नहर का निर्माण और रेत का अवैध उत्खनन किसके इशारे पर चल रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबा दिया जाएगा?

